खैरागढ़। छत्तीसगढ़ नवीन व्यावसायिक प्रशिक्षक कल्याण संघ जिला केसीजी ने शासकीय विद्यालयों में वर्ष 2014 से समग्र शिक्षा के अंतर्गत संचालित व्यावसायिक शिक्षा में कार्यरत प्रशिक्षकों की लंबित समस्याओं और विभिन्न मांगों को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। संघ ने ठेका एवं कंपनी आधारित व्यवस्था समाप्त कर प्रशिक्षकों को विभागीय व्यवस्था में समायोजित करने, सेवा सुरक्षा देने तथा सम्मानजनक मानदेय निर्धारित करने की मांग की है। इस दौरान संघ के जिलाध्यक्ष मिथलेश पटेल सहित बड़ी संख्या में प्रशिक्षक मौजूद रहे। संघ ने ज्ञापन में कहा है कि प्रदेश के करीब 1,285 शासकीय विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा संचालित हो रही है, जहां विद्यार्थियों को रोजगारपरक एवं कौशल आधारित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वर्तमान में ब्यूटी एंड वेलनेस, अपैरल, पावर, टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी, कंस्ट्रक्शन, रिटेल, ऑटोमोबाइल, एग्रीकल्चर, टेलीकॉम, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर, आईटी, प्लंबिंग, मीडिया एंड एंटरटेनमेंट, बैंकिंग एवं फाइनेंस तथा हेल्थ केयर सहित करीब 15 ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। संघ ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और नीति आयोग की रिपोर्ट में व्यावसायिक शिक्षा के एकीकरण तथा प्रशिक्षकों की व्यवस्था को मजबूत करने पर दिए गए जोर का भी उल्लेख किया।
₹38,100 मानदेय और नियमित वेतनवृद्धि की मांग
संघ की प्रमुख मांगों में हरियाणा एवं दिल्ली की तर्ज पर व्यावसायिक प्रशिक्षकों को ₹38,100 प्रतिमाह मानदेय देने तथा प्रत्येक वर्ष नियमित वेतनवृद्धि अथवा इंक्रीमेंट का प्रावधान लागू करना शामिल है। इसके अलावा तृतीय पक्ष एवं कंपनी आधारित व्यवस्था समाप्त कर प्रशिक्षकों को विभागीय व्यवस्था में समायोजित कर सेवा सुरक्षा देने की मांग की गई है। संघ ने PAB 2025-26 के अनुसार स्वीकृत ₹1,000 प्रतिमाह मानदेय वृद्धि की लंबित राशि अनुपूरक बजट से स्वीकृत कराकर संबंधित प्रशिक्षकों को ₹12,000 एरियर्स देने, 1,029 प्रशिक्षकों के लंबित मई-जून के मानदेय का तत्काल भुगतान करने तथा PAB 2026-27 में स्वीकृत राशि के अनुरूप पूर्ण मानदेय देने की मांग भी रखी है। नवीन निविदा में चयनित कंपनियों को निर्देशित कर पहले से कार्यरत सभी 1,029 प्रशिक्षकों को यथावत रखने तथा हेल्थ केयर ट्रेड के 121 अनुभवी प्रशिक्षकों का मानदेय ₹23,000 प्रतिमाह निर्धारित करने की मांग की गई है। लक्ष्य कंपनी द्वारा निष्कासित चार प्रशिक्षकों को प्राथमिकता के आधार पर पुनः सेवा में बहाल करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
GL और इंडस्ट्रियल विजिट की राशि का हो भुगतान
संघ ने इंडस्ट्रियल विजिट एवं गेस्ट लेक्चर में की गई 25 प्रतिशत कटौती की राशि का पूर्ण भुगतान कराने तथा Indus एवं Gram Tarang कंपनियों को निर्देशित कर प्रशिक्षकों की लंबित GL एवं IV राशि तत्काल दिलाने की मांग की है। वहीं, पिछले तीन वर्षों से 478 विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा संचालित होने के बावजूद प्रशिक्षकों की कमी होने का आरोप लगाते हुए वहां तत्काल प्रशिक्षकों की नियुक्ति अथवा पदस्थापना करने की मांग की गई है।
अवकाश और कार्यदायित्व तय करने की मांग
प्रशिक्षकों ने प्रतिवर्ष 20 दिवस आकस्मिक अवकाश, समुचित चिकित्सा अवकाश तथा महिला प्रशिक्षकों के लिए मातृत्व अवकाश की सुविधा देने और स्पष्ट अवकाश नीति लागू करने की मांग की है। साथ ही प्रत्येक माह निर्धारित समय पर मानदेय भुगतान सुनिश्चित करने तथा विभागीय एवं कंपनी स्तर पर होने वाले अनावश्यक विलंब को समाप्त करने की मांग रखी गई। ज्ञापन में प्रशिक्षकों को निर्धारित कार्यों के अलावा गैर-व्यावसायिक कार्यों में नहीं लगाने और उनके कार्य एवं दायित्व स्पष्ट करने की मांग भी की गई है। हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी ग्रीष्मकालीन अवकाश देने तथा प्रशिक्षकों की समस्याओं और लंबित मामलों की नियमित समीक्षा के लिए विभागीय स्तर पर प्रभावी समिति गठित करने की मांग की गई है।
चपरासी से लेकर शिक्षक तक का काम, फिर भी वेतन के लिए इंतजार
संघ जिलाध्यक्ष मिथलेश पटेल ने कहा कि प्रशिक्षक लंबे समय से सरकार से ठेका पद्धति समाप्त कर विभागीय व्यवस्था में समायोजित करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूलों में बच्चों को कौशल शिक्षा देने के लिए पदस्थ प्रशिक्षकों से कई जगह चपरासी से लेकर प्राचार्य तक के काम कराए जाते हैं। कई विद्यालयों में विषय शिक्षकों की कमी होने पर प्रशिक्षकों से अन्य विषय भी पढ़ाने का कार्य लिया जाता है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अपेक्षाकृत कम मानदेय मिलता है। पटेल ने कहा कि मानदेय भी समय पर नहीं मिलता। कई बार महीनों तक भुगतान लंबित रहता है। गर्मी की छुट्टियों के दौरान मई-जून में स्कूल बुलाकर काम कराने के बाद भी मानदेय भुगतान नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भी प्रशिक्षकों का तीन माह का मानदेय लंबित है। दीपावली और होली जैसे त्योहारों पर भी कई बार बिना वेतन के रहना पड़ता है और प्रशिक्षक उधार लेकर त्योहार मनाने को मजबूर होते हैं।
दुधमुहे बच्चे के साथ पहुंची महिला प्रशिक्षक
ज्ञापन के दौरान महिला प्रशिक्षकों ने मातृत्व अवकाश की सुविधा नहीं मिलने की समस्या भी उठाई। एक महिला प्रशिक्षक अपने दुधमुहे बच्चे को लेकर ज्ञापन सौंपने पहुंची, जिसने प्रशिक्षकों की कार्य परिस्थितियों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच उत्पन्न कठिनाइयों को सामने रखा। संघ ने शासन-प्रशासन से सभी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है। जिलाध्यक्ष मिथलेश पटेल ने चेतावनी दी कि यदि मांगों का जल्द निराकरण नहीं किया गया तो संघ आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

