
खैरागढ़/छुईखदान. जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं और संवेदनशील व्यवस्थाओं की कमी को उजागर करने वाला एक मामला सामने आया है। निर्माणाधीन मकान में काम करते समय दुर्घटना का शिकार हुए एक व्यक्ति के शव को परिजनों को खुले मालवाहक वाहन में ले जाना पड़ा। घटना के बाद शव वाहन उपलब्ध नहीं होने के आरोपों ने एक बार फिर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।जानकारी के अनुसार ग्राम उर्तुली निवासी झलेप गोंड, पिता भांवत गोंड उम्र करीब 45 वर्ष 29 मई, शुक्रवार को अपने निर्माणाधीन मकान में सेन्ट्रिंग बांधने के लिए ऊपर चढ़े हुए थे। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वे नीचे गिर पड़े। गंभीर रूप से घायल झलेप गोंड को परिजन तत्काल निजी वाहन से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छुईखदान लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। परिजनों का आरोप है कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अस्पताल प्रबंधन की ओर से शव को घर तक पहुंचाने के लिए कोई शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। मजबूरी में उन्हें शव को एक मालवाहक वाहन में रखकर गांव ले जाना पड़ा। इस दौरान मौजूद लोगों ने भी बताया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। कई मामलों में पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे मृतक के परिवार को अतिरिक्त मानसिक और आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिला बने लगभग पांच वर्ष हो चुके हैं लेकिन पूरे जिले में अब भी केवल एक मुक्तांजलि वाहन संचालित है। दूरस्थ क्षेत्रों से जुड़े मामलों में वाहन की उपलब्धता बड़ी समस्या बनी हुई है। कई बार वाहन समय पर नहीं पहुंच पाता, जिसके कारण परिजनों को शव ले जाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ती है। मामले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छुईखदान के बीएमओ डॉ.मनीष बघेल ने बताया कि शव वाहन के लिए खैरागढ़ से व्यवस्था की गई थी और परिजनों को सूचित किया गया था कि वाहन पहुंचने में लगभग आधा घंटा लगेगा। उनके अनुसार परिजन वाहन के आने की प्रतीक्षा किए बिना शव लेकर रवाना हो गए।घटना ने जिले में शव परिवहन जैसी बुनियादी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है। सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रत्येक विकासखंड स्तर पर पर्याप्त शव वाहन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि किसी भी परिवार को अपने प्रियजन के अंतिम सफर में ऐसी पीड़ादायक परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।


