खैरागढ़। वनांचल क्षेत्र के सुदूर ग्राम निजामडीह से मानवता और संवेदनशील प्रशासन की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। यहां सात मासूम बेटियों के जीवन में मां की कमी को भरने के लिए जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि आगे आए हैं और उनकी जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई है। करीब तीन महीने पहले अमर सिंह की पत्नी का ब्रेन ट्यूमर के कारण निधन हो गया था। इस हादसे ने पूरे परिवार को झकझोर दिया। मां के जाने के बाद घर में सन्नाटा छा गया और पीछे रह गईं सात बेटियां, जिनकी उम्र 7 माह से 13 वर्ष तक है। पिता मजदूरी कर परिवार चलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन काम के लिए बाहर जाने पर बच्चियां अक्सर अकेली रह जाती थीं।
प्रशासन ने संभाली जिम्मेदारी
बच्चियों की हालत को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने सराहनीय पहल करते हुए प्रत्येक बच्ची की देखरेख का जिम्मा लिया है। उनके भोजन, शिक्षा, कपड़े और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने का संकल्प लिया गया है।
खामोशी से उम्मीद तक का सफर
ग्रामीणों के अनुसार, मां के निधन के बाद घर में गहरा सन्नाटा और उदासी थी। बच्चों की मुस्कान तक गायब हो गई थी। लेकिन अब प्रशासन और समाज के सहयोग से फिर से उम्मीद की किरण नजर आने लगी है। स्थानीय महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं भी नियमित रूप से बच्चियों की देखभाल कर रही हैं और हर संभव मदद पहुंचा रही हैं। समाज के लिए प्रेरणा निजामडीह की यह पहल एक मजबूत संदेश देती है कि जब प्रशासन और समाज साथ खड़े होते हैं तो कोई भी परिवार अकेला नहीं रहता। यह उदाहरण बताता है कि सामूहिक जिम्मेदारी से हर संकट का सामना किया जा सकता है।
जहां एक ओर दुख की गहरी छाया थी वहीं अब सहयोग और संवेदना ने उम्मीद की नई रोशनी जगा दी है। निजामडीह आज इंसानियत की एक मिसाल बनकर उभरा है।

