खैरागढ़। नगर में आगामी 2026 के नगर पालिका चुनाव को लेकर जहां राजनीतिक सरगर्मी तेज होती जा रही है वहीं कांग्रेस संगठन के भीतर बढ़ती अंदरूनी खींचतान चिंता का विषय बनती जा रही है। स्थानीय स्तर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच एकजुटता की बजाय आपसी मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं जिसका असर अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म खासकर व्हाट्सएप ग्रुप में साफ देखा जा सकता है। जानकारी के अनुसार खैरागढ़ के विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुपों में कांग्रेसी कार्यकर्ता एक-दूसरे को ‘आईना दिखाने के नाम पर खुलकर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। जहां उन्हें विपक्ष के खिलाफ रणनीति बनानी चाहिए, वहां वे आपस में ही बहस और विवाद में उलझे हुए हैं। कई कार्यकर्ता अपने-अपने नेताओं के समर्थन में पोस्टर और मैसेज साझा कर रहे हैं, जिससे संगठन में गुटबाजी और गहरी होती नजर आ रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह स्थिति पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। व्हाट्सएप ग्रुप में सक्रिय रहने वाले कई कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर सक्रिय नहीं दिख रहे हैं जिससे संगठन की पकड़ कमजोर होती जा रही है। जो कार्यकर्ता सोशल मीडिया में सबसे ज्यादा सक्रिय हैं वे मैदान में विपक्ष के खिलाफ उतने सक्रिय नजर नहीं आते।सूत्रों के मुताबिक संगठन और जनप्रतिनिधियों के समर्थक गुटों के बीच पोस्टर वार और मैसेज वार आम हो गई है। हर कोई खुद को बड़े नेता का करीबी बताने में लगा है लेकिन जनता के मुद्दों पर एकजुट होकर आवाज उठाने की कमी साफ दिखाई दे रही है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले नगर पालिका चुनाव में कांग्रेस को अपने ही कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बिठाने में बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस आपसी खींचतान का सीधा लाभ विपक्ष उठा सकता है और कांग्रेस को चुनाव में नुकसान झेलना पड़ सकता है। फिलहाल जरूरत इस बात की है कि संगठन स्तर पर अनुशासन और एकजुटता पर जोर दिया जाए ताकि कार्यकर्ता आपसी विवाद छोड़कर जनता के मुद्दों और विपक्ष के खिलाफ मजबूती से खड़े हो सकें। अन्यथा 2026 के चुनाव में कांग्रेस को अपने ही कार्यकर्ताओं से जूझना पड़ सकता है।
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